Surendra Kumar Shukla Bhramar5

Surendra Kumar Shukla Bhramar5's Bhramar Ka Dard Aur Darpan

this contains the social pain of the society, social issues,
hindi poem, kavita , different colours of life

  • Rated2.6/ 5
  • Updated 4 Years Ago

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कल कुछ मीठे सपने आये
कल कुछ मीठे सपने आये मेरा हुआ प्रमोशन गदगद उछला खिला खिला था इतना बढ़ा इमोशन ...
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चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
क्यों मरते हो हे ! आतंकी कीट पतंगों के मानिंद हत्यारे तुम-हमे बुलाते जागें प...
4 Years Ago
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खेल खेल मै खेल रहा हूँ
खेल- खेल मै खेल रहा हूँ कितने पौधे हमने पाले नन्ही मेरी क्यारी में सुंदर सी फ...
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ऊंचे नीचे टेढ़े - मेढ़े नागिन जैसे रस्ते हैं गहरी खांई गिरते पत्थर बड़े ...
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सभी मित्रों को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ढेर सारी शुभ कामनाएँ माँ शारदा ...
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BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN
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शारदीय नवरात्रि की ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनायें मित्र आप समस्त ...
5 Years Ago
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