Surendra kumar shukla Bhramar5

Surendra Kumar Shukla Bhramar5's BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

this contains the social pain of the society, social issues,
hindi poem, kavita , different colours of life

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  • Updated 4 Years Ago

कल कुछ मीठे सपने आये

Updated 4 Years Ago

कल कुछ मीठे सपने आये मेरा हुआ प्रमोशन गदगद उछला खिला खिला था इतना बढ़ा इमोशन कलयुग सतयुग जैसा था कल भ्रष्ट मेरे जो अधिकारी कल 'हार '...
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