पुरानी कहानी
बिछड़ने से ज़रा पहले बिछड़ने की ना कोई बात थी बस एक सूनी रसोई और कमज़ोर सी एक आस थ...
7 Years Ago
कोना
घर का वो कोना ही ठीक है, इस दुनिया में न दिल मिलता है ना दिमाग मेज़ पे चढ़ी गर...
7 Years Ago
पड़ाव
एक पड़ाव था जो यूँ ही निकल गया एक ख़याल था जो यूँ ही पिघल गया कोशिश बहुत की प...
7 Years Ago
ढूँढता हूँ
कोई मौका तो कोई कंधा ढूँढता है अपनी सिलवटें छुपा सकूं, मैं ऐसा भेस ढूँढता हू...
8 Years Ago
सर्द दोपहर
सर्द दोपेहेरें भी अजीब हैं लगता है इनमे समय भी रुक जाता है ना कोई तू-तू ना क...
8 Years Ago
ख़ुद की कहानी
वक़्त की धुप में झुलसे हुए से कुछ एहसास हैं कुछ तेरे तो कुछ मेरे पास हैं मैं ...
8 Years Ago