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Laxmi N. Gupta's Kavyakala

Primarily my poems and prose pieces

  • Rated2.4/ 5
  • Updated 4 Months Ago

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नव विश्व का निर्माण
  इस विशाल विश्व में एक अदना इन्सान   भयभीत और हैरान किसी तरह से अपने भय प...
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झीनी-झीनी बीनी चदरिया
  झीनी - झीनी बीनी चदरिया , काहे कै ताना , काहै कै भरनी , कौन तार से बीनी चदरिय...
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कबीर का एक और चुनरी वाला पद
  काहे   न   रँगायो   गोरी   चुनरी   पाँच   रंग   माँ ई   चुनरी   तोहे   सद्‌गुरु   दी...
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प्रभु से नम्र निवेदन
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