अभी के लिए बस इतना ही
पिछले तीन सालों से मैं लगातार यहाँ, इस ब्लॉग पर, कुछ न कुछ लिखता आ रहा हूँ। चाह...
10 Years Ago
कैद
हर रोज़ एक चार-बाई-तीन की मेज़ के सामने, बैठ जाते हैं लोग और बेचा करते हैं अपनी क...
10 Years Ago
घर
एक घर हो जिसे आप अपना कह सकें, हर किसी की चाहत होती है। इस कविता में अपने घर होन...
10 Years Ago
प्रमाण
तकरीबन दो महीनों से मैंने यहाँ कुछ भी पोस्ट नहीं किया है और वो इसलिए नहीं कि क...
10 Years Ago
ज़रा सोचो
यह कविता थोड़ी गहरी है और रोज़मर्रा की चीज़ों से ज़रा हटके है। हो सकता है कि इस कव...
10 Years Ago