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Shayar's Ek Shayar Gaddar

एक शायर के चंद पन्नों
में खुद को समेटने की
जुर्रत कर रहा हु,

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उंगलियों पे तितलियां | एक शायर "गद्दार"

Updated 10 Years Ago

उंगलियों पे तितलियां | एक शायर "गद्दार"
शाम को बिछा कर बैठो, बहते पानी सी फिसलती हो जैसे। आफ़ताब से छुपती ओस की बुँदे, नई सुबह सी संभलती हो जैसे। मासूम सी मुस्कुराहट फिर रूठ जाना, सोते बच्चे सी करवट
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