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Raju Ranjan's Galpkatha

Hindi stories/kahani and poetry/kavita by Raju Ranjan

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  • Updated 4 Years Ago

सेंटोरियन

Updated 8 Years Ago

सेंटोरियन
अचानक मेरा सिर तेजी से घूमने लगा । सबकुछ घूमते - घूमते अपनी परिधि को छोटा बनाता हुआ मानों एक बिंदु में समा गया हो । और फिर मेरी चेतना समाप्त हो गयी । जब मुझे होश आया तो देखा कि दो मानव की शक्ल वाले लोग मुझे घसीट कर एक दीवार की ओट में ले जा रहे हैं ।
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