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Jyoti Ahlawat's The Unseen World

piece of poetry presenting different thoughts

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  • Updated 3 Years Ago

हवा रोज़ से कुछ ज्यादा नम है

Updated 8 Years Ago

हवा रोज़ से कुछ ज्यादा नम है
हवा आज रोज़ से कुछ ज्यादा नम है  लगता है आँखें हमारी ही नहीं  उनकी भी नम है  तसव्वुर का इमाल इधर ही नहीं  उधर भी है  वरना ...
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