L

Laxmi N. Gupta's Kavyakala

Primarily my poems and prose pieces

  • Rated2.4/ 5
  • Updated 5 Months Ago

एक दिन था

Updated 8 Years Ago

एक दिन था जब हम तुम पे मरते थे एक दिन था जब तुम हम पे मरते थे अब न हम तुम पे मरते हैं न तुम हम पे मरते हो हमारे और तुम्हारे किसी और पे मरने...
Read More
...