Originally written on Facebook on 15th April, 2018
तोड़ दो मस्ज़िद, बना लो मंदिर पर राम कहाँ से लाओगे, जब उसी मंदिर में एक मासूम ...
7 Years Ago
एक सुबह अखबारों वाली, एक गर्म चाय के प्यालों वाली
एक दिन ऐसा भी देना जिसको बराबर जीने का अधिकार हो, एक रात दे देना ऐसी जिसमें डर...
7 Years Ago
शब्दों पे सवार मैं
शब्दों पे सवार मैं , घूम रहा सँसार मैं , पालकी भी मैं ही हूँ और हूँ यहाँ कहार म...
8 Years Ago
Who cooked my Geese
Planning to write a Self-Help Book on how to not only survive, but thrive in the face of loaded questions from the Woman (or Women for tho......
9 Years Ago
कभी घोंसले अपने सजा लेते तो अच्छा होता
कभी रूठी ज़िंदगी को मना लेते तो अच्छा होता कभी घोंसले अपने सजा लेते तो अच्छा ...
9 Years Ago
न स्याही मेरे संग चली और न शब्दों ने दिया साथ
न स्याही मेरे संग चली और न शब्दों ने दिया साथ, अपनी तो थकी थकी सी ही गुज़री हर र...
10 Years Ago