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Pratyaksha's Pratyaksha

my thoughts , my imaginations

  • Rated2.9/ 5
  • Updated 6 Years Ago

रुकी हुई रेल

Updated 14 Years Ago

हिलते पर्दे से छनकर रौशनी आती है , शीशे के बोल में अरालिया की एक लतर , किताबों की टांड में एक ग्रॉसमन , रिल्के की ना समझी कोई कविता की एक अ...
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