Ravi Kant Sharma

Ravi Kant Sharma's Shri Ramcarit Manas

If we begin to love God not worth any earthly object that
appears to be a love.

  • Rated2.2/ 5
  • Updated 12 Years Ago

Recent blog posts from Shri Ramcarit Manas


॥ मंगलाचरण - बालकाण्ड ॥
॥ मंगलाचरण - बालकाण्ड ॥
श्लोक वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे...
12 Years Ago
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॥ गुरु वंदना ॥
॥ गुरु वंदना ॥
॥ चौपाई ॥ बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरि...
12 Years Ago
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॥ ब्राह्मण और साधु पुरुषों की वंदना ॥
॥ ब्राह्मण और साधु पुरुषों की वंदना ॥
॥ चौपाई ॥ बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल ग...
12 Years Ago
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॥ आसुरी स्वभाव वालों की वंदना ॥
॥ आसुरी स्वभाव वालों की वंदना ॥
॥ चौपाई ॥ बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥ पर हित हान...
12 Years Ago
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॥ संत और असंत मनुष्यों वंदना ॥
॥ संत और असंत मनुष्यों वंदना ॥
॥ चौपाई ॥ बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥ बिछुरत एक प्...
12 Years Ago
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॥ राम भक्तिमयी कविता की महिमा ॥
॥ राम भक्तिमयी कविता की महिमा ॥
॥ चौपाई ॥ आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी॥ सीय राममय सब जग जानी...
12 Years Ago
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