कुछ जानी, कुछ पहचानी, एक अनबूझ सी कहानी। कुछ नहीं से कुछ होने की कहानी। अंधेरों के रौशनी में डूबने की कहानी। कहानी वो जिसमें पारस पत्थर भी है और डूबती कश्ती भी। कहानी वो जिसमें सपना भी है और सपने को जीने का हौंसला भी। कहानी वो जिसमे मैं तुमसे जुड़ता हूँ। मेरे मैं
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