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Yogendra Joshi's Vichaar Sankalan

It is an assorted collection of ideas relating to philosphy,
religion, spiritualism, morality and human behaviour as
studied and understood by seers and men of wisdom of the
past.

  • Rated2.8/ 5
  • Updated 4 Years Ago

Recent blog posts from Vichaar Sankalan


“मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति …” - मनुष्यों एवं पशुओं में अंतर पर भर्तृहरि के नीतिवचन
“मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति …” - मनुष्यों एवं पशुओं में अंतर पर भर्तृहरि के नीतिवचन
संस्कृत साहित्य के सुप्रसिद्ध ग्रंथ “शतकत्रयम्” के रचयिता भर्तृहरि के बार...
4 Years Ago
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“कलियुगे जना: अघासुरायन्ते” - श्रीमद्भागवत्पुराण के अनुसार कलियुग का मूल स्वरूप
“कलियुगे जना: अघासुरायन्ते” - श्रीमद्भागवत्पुराण के अनुसार कलियुग का मूल स्वरूप
श्रीमद्भागवत्पुराण १८ प्रमुख पुराणों में से एक है जिसमें भगवान् विष्णु एवं...
4 Years Ago
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“न विश्वसेत् अविश्वस्ते …” - पंचतंत्र में वर्णित कौवे एवं चूहे की नीतिकथा
“न विश्वसेत् अविश्वस्ते …” - पंचतंत्र में वर्णित कौवे एवं चूहे की नीतिकथा
पंचतंत्र के नीतिवचनों पर आधारित अपनी 7 फरवरी 2010 की पोस्ट में मैंने ग्रंथ का स...
4 Years Ago
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ईशवास्योपनिषद्‍ का दर्शन - परमात्मा विविध प्राणियों के रूप में स्वयं को प्रकट करता है
ईशवास्योपनिषद्‍ का दर्शन - परमात्मा विविध प्राणियों के रूप में स्वयं को प्रकट करता है
ईशावास्योपनिषद्‍ ग्यारह प्रमुख उपनिषदों में से एक है। यह बहुत ही छोटा ग्रं...
4 Years Ago
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छान्दोग्य उपनिषद्‍ में परमात्मा की व्यापकता पर उद्दालक-श्वेतकेतु संवाद
वैदिक चिंतकों के अनुसार यह सृष्टि परब्रह्म या परमात्मा से उत्पन्न हुई है और ...
4 Years Ago
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“अर्थनाशं मनस्तापं … मतिमान्न न प्रकाशयेत्” आदि चाणक्यनीति वचन
“चाण्क्यनीतिदर्पण” एक छोटी पुस्तिका है जिसके सभी छंदों में नीतिवचन निहित ह...
4 Years Ago
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