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अतुल's Lakhnawi

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ब्लॉग - लेख,
विचार और
कटाक्ष...

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मानव

Updated 12 Years Ago

कभी मैं उसके आँगन में लहराता था, धूप लू में बाहें फैला, छाँव के आँचल से कुटिया को सहलाता था। अब उन्हीं गगन चूमती कुटियों की छाँव में पलता ह...
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