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अतुल's Lakhnawi

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ब्लॉग - लेख,
विचार और
कटाक्ष...

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मानसून

Updated 13 Years Ago

कब तक सहोगे ये शुष्क सा जीवन, क्षीण करो ये ताप का बन्धन। धो डालो ये ताप-वेदना, अब बूँदो को बहने दो, नूतन आशा देंगी,इन बूँदो को निर्झर झरने द...
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