Vinay Prajapati

Vinay Prajapati's Takhleeq-e-nazar

Origin of Poetry by Vinay Prajapati

  • Rated2.7/ 5
  • Updated 11 Years Ago

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मानूस हर्फ़ - तख़लीक़-ए-नज़र
मानूस हर्फ़ - तख़लीक़-ए-नज़र
शाम उतर रही थी, मैं सोफ़े पे लेटा अपने सफ़र की थकान उतार रहा था… हाँ, उसी शाम उसका...
11 Years Ago
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रिश्ते - तख़लीक़-ए-नज़र
रिश्ते - तख़लीक़-ए-नज़र
कुछ रिश्ते वक़्त की आँच पर धीरे-धीरे तपकर एक दिन राख हो जाते हैं फ़ना हो जाते है...
11 Years Ago
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रोना था इसलिए मिला मैं तुझे - तख़लीक़-ए-नज़र
रोना था इसलिए मिला मैं तुझे - तख़लीक़-ए-नज़र
सावन बदल गया, मुआ टल गया घोर अंधेरा था, दिया जल गया बातें तेरी… भूल जाऊँ दिलाँ...
11 Years Ago
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