Aishwarya Mohan Gahrana

Aishwarya Mohan Gahrana's Gahrana

स्वान्त सुखाय, सर्व जन
हिताय कुछ भी..

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वो रात गुजरी थी

Updated 7 Years Ago

वो रात गुजरी थी
वो रात गुजरी थी खड़ामा खड़ामा किसी चोर पुराने की तरह गुपचुप, उम्मीद में लौ ए चराग़ शमा ए सुब दिल बैठे बैठे जाता रहा जाता रहा। चुपचुप चीखते चटखते तलवे तले जमीन थी भी कुछ बोझिल बोझिल उम्मीद के लम्बे साय…
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