कई चक्कर लगाने के बाद प्यारे लाल ‘आवारा’ से एक प्रातः भेंट हुई। अभिवादन, आशीष, अपना छोटा-सा परिचय के बाद उनकी सिगरेट पीने की तलब का, बाजार से जाकर सिगरेट का पैकेट ला देने के एवज में, उनका एक दिन गुरुत्व का आशीर्वाद पा लिया। जो कुछ जासूसी नाॅवल के रूप में लिखा था-उन्होंने पृष्ठ पलटें। कलम निकाली, वर्तनियों की गलतियां दुरुस्त करना बताया। इस तरह गुरुता का साधुवाद मुझे मिल गया। लम्बा प्रसंग हैं उनकी सेवा करने और उनकी अनुकम्पा प्राप्त करने का जिसका जिक्र यहां विषय से हटकर है।
Read More